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“मोर सांवादिकता आरु सामाजिक कर्म जीवनर समु परिक्रमा” पुस्तक का विमोचन
खेरनी, 3मार्च 2026:- वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार धर्मेंद्र खाखलारी की आत्मकथात्मक कृति “मोर सांवादिकता आरु सामाजिक कर्म जीवनर समु परिक्रमा” का विधिवत विमोचन एक गरिमामय समारोह में संपन्न हुआ। यह पुस्तक उनके लंबे पत्रकारिता जीवन, सामाजिक संघर्षों और साहित्यिक साधना का सजीव दस्तावेज मानी जा रही है।
ग्यात हो कि उक्त पुस्तक का विमोचन असम के एक प्रतिष्ठित असमिया समाचार चैनल प्रतिदिन टाइम्स के मुख्य संपादक नीतुमनी सैकिया द्वारा उनके गुवाहाटी स्थित मुख्य कार्यालय में किया गया। समारोह का वातावरण आत्मीय, गरिमामय और प्रेरणादायी रहा। इस अवसर पर सैकिया ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक आत्मकथा नहीं, बल्कि जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता का प्रेरक उदाहरण है। बता दें कि कार्बी आंग्लोंग जिले के हावराघाट क्षेत्राधीन के निवासी धर्मेंद्र खाखलारी ने अपने पत्रकारिता जीवन में ग्रामीण समाज की समस्याओं—सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही—को निरंतर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना। पुस्तक में उनके पत्रकारिता अनुभवों, संघर्षों, उपलब्धियों और सामाजिक आंदोलनों का विस्तृत और तथ्यात्मक वर्णन किया गया है, जो नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
साहित्य के क्षेत्र में भी धर्मेंद्र खाखलारी का योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे केवल समाचार लेखक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील कवि और चिंतक भी हैं। उनकी कृतियों में “आकाशर परा खहि परिल एटा तेज रंगा सूर्य” (2010), “आत्मोपलब्धि” (2012), “बड़ो कृष्टिर निरव साधक क्षीरोद खाखलारी” (2014) और “महत् लोकर अमृत बानी” (2023) शामिल हैं। इन पुस्तकों में सामाजिक यथार्थ, आत्मचिंतन और नैतिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है। उनकी नवीनतम आत्मकथात्मक कृति (2026) उनके जीवन-संघर्ष और अनुभवों का संपूर्ण परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करती है।
यह कृति समाज के प्रति उत्तरदायित्व और निष्पक्ष पत्रकारिता की भावना को सुदृढ़ करती है। उपस्थित जनों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक नई पीढ़ी के सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
उक्त कार्यक्रम में धर्मेंद्र खाखलारी की धर्मपत्नी रूपाली बासुमातरी, बेटी अमृता खाखलारी, पुत्र चंदन खाखलारी तथा उनके सहयोगी—समराज चौहान, नारायण बरुवा, रत्नकांत पाठक और सुभाष बासुमातरी भी उपस्थित रहे। सभी ने लेखक को शुभकामनाएँ देते हुए उनके साहित्यिक और सामाजिक योगदान की सराहना की।
समारोह के अंत में धर्मेंद्र खाखलारी ने उपस्थित अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उनके व्यक्तिगत जीवन की कहानी भर नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और जनसेवा की भावना का प्रतिबिंब है।




















