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असम प्रदेश तैलिक साहू महासभा ने हिंदू नववर्ष 2083 धूमधाम से मनाया और इसे प्रकृति दिवस घोषित करने की मांग की
चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष के पहले दिन से विक्रमी संवत का आरंभ होता है जिसे सभी सनातनी और हिन्दू नए वर्ष के आगमन के रूप में भव्य और भक्तिभाव के साथ बड़े ही उत्साह से मनाते हैं। इस 19 मार्च 2026 को विक्रमी संवत 2083 के आरंभ का उत्सव पूरे भारत में अलग अलग नामों से मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र में इसे गुडी पड़वा कहते हैं। असम प्रदेश तैलिक साहू महासभा ने भी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ प्रदेश अध्यक्ष पूर्व जज कमलेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक शोभायात्रा गुवाहाटी में निकाली, भगवान श्री राम का जयकारा लगाया और मिठाइयां वितरित की। मंदिरों में विशेष चढ़ावा भी चढ़ाए। ज्ञातव्य हो कि इस दिन सभी हिन्दू अपने घरों को साफ कर सुबह ही नहा धो पवित्र होकर धूप दीप जलाते और अपने इष्टदेव की प्रार्थना कर मंगल कामना करते हैं, तुलसी पूजन भी करते हैं। अपने घरों में भगवा झंडा लहराते हैं और दरवाजे के पास रंगोली बनाते हैं। सभी लोगों में मिठाई और प्रसाद बांटे जाते हैं। जय श्री राम के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय और प्रफुल्लित हो उठता है। पेड़ पौधों में नई जान आ जाती है, जो पहले सूखने लगे थे उनमें अब नए नए पत्ते आने लगते हैं, मौसम सुहावना हो जाता है। कहते हैं कि इसी दिन सर्वशक्तिमान परमपिता परमेश्वर ने अपने आनंद के लिए सृष्टि की रचना की थी। शाम को संध्या पूजन और घर में विशेष रोशनी कर दीपक जलाए जाते हैं। हिन्दू नववर्ष को विशेष बनाने और सभी को खुलकर अपने परिवार और संबंधियों के साथ उत्सव मनाने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारों को इस दिन को प्रकृति दिवस घोषित कर अवकाश की घोषणा करनी चाहिए ताकि प्रकृति के बदलाव को लोग अच्छी तरह देख और समझ सकें तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर पृथ्वी को विनाश से बचा सकें।

















