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असम विश्वविद्यालय शिलचर के गोरखा विद्यार्थियों द्वारा NIT Silchar एवं शिलचर मेडिकल कालेज एवं हस्पताल के सहयोग से “नौमती” (Naumati) शीर्षक से एक शैक्षणिक व्याख्यान एवं परिचय समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के विपिन चंद्र पाल सेमिनार हाल में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का संचालन श्री राम चिमारिया ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं विशेष आमंत्रित के रूप में प्रो. शांति पोखरेल (संस्कृत विभाग, असम विश्वविद्यालय), डॉ. केशव लुइटेल (संस्कृत विभाग, गुरुचरण विश्वविद्यालय), डॉ. उत्तम पालुया (बंगाली विभाग, गुरुचरण विश्वविद्यालय) तथा समाजसेवी प्रकाश चेतत्री उपस्थित रहे।
प्रो. पोखरेल ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान प्रणाली और गोरखा संस्कृति के पारस्परिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत, नेपाली एवं बंगाली भाषाओं के बीच समानताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गोरखा संस्कृति ने प्राचीन परंपराओं को संजोते हुए समय के साथ निरंतर विकास किया है।
डॉ. लुइटेल ने आधुनिक युग में प्रगति के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. पालुया ने गोरखा समुदाय की उदार, विनम्र एवं अतिथि-सत्कार की भावना की सराहना की। वहीं समाजसेवी प्रकाश चेतत्री ने गोरखा समुदाय की वीरता और साहसिकता को उजागर किया।
इस कार्यक्रम में असम विश्वविद्यालय, एनआईटी शिलचर एवं शिलचर मेडिकल कॉलेज के गोरखा विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जो उनके आपसी एकता और सुदृढ़ संबंधों को दर्शाती है।
अंत में मोनिका चेतत्री के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।





















