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शिलचर के आनंदमार्ग आश्रम में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई आनंदमूर्ति जी की 105वीं जयंती
शिलचर के रवीन्द्र सरणी स्थित आनंदमार्ग आश्रम में शुक्रवार को आनंदमार्ग के प्रवर्तक, प्रख्यात धर्मगुरु एवं समाज सुधारक प्रभात रंजन सरकार की 105वीं जयंती श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। “आनंद पूर्णिमा” के रूप में प्रसिद्ध इस पावन अवसर पर सुबह से ही आश्रम परिसर में भक्तों और अनुयायियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
दिनभर चले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान भक्ति संगीत, आध्यात्मिक चर्चा, स्मृतिचারণ तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। पूरे आश्रम परिसर में आध्यात्मिक वातावरण और भाईचारे की भावना देखने को मिली।
कार्यक्रम में शिलचर डायोसिस के सचिव आचार्य अमृतशिवानंद अवधूत ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीश्री आनंदमूर्ति जी का जन्मदिवस “आनंद पूर्णिमा” के रूप में मनाया जाता है, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायक दिवस है। उन्होंने आनंदमूर्ति जी के आध्यात्मिक दर्शन और मानव सेवा के आदर्शों पर प्रकाश डाला।
वहीं, भक्ति प्रमुख पन्ना राय ने अपने वक्तव्य में श्रीश्री आनंदमूर्ति जी के बहुआयामी योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को आध्यात्मिकता, सेवा और मानवता का मार्ग दिखाया।
कार्यक्रम के समापन पर दोपहर में श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरित किया गया। इसके साथ ही शाम को गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के बीच वस्त्र वितरण तथा आम लोगों को खिचड़ी प्रसाद भी वितरित किया गया।
इस अवसर पर साधन पुरकायस्थ, सुरंजन राय, समर पाल, बॉबी राय, स्वप्ना राय, रूबी दास, शिल्पी चक्रवर्ती सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं भक्तगण उपस्थित थे।



















