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बंग साहित्य एवं संस्कृति सम्मेलन रामकृष्णनगर ने 11 भाषा शहीदों को दी श्रद्धांजलि
गौतम सरकार, रामकृष्णनगर, 19 मई।
ऐतिहासिक भाषा शहीद दिवस के अवसर पर बराक उपत्यका बंग साहित्य एवं संस्कृति सम्मेलन की रामकृष्णनगर आंचलिक समिति द्वारा सोमवार को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से 11 भाषा शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
सुबह छह बजे स्थानीय नेताजीबाग से संस्था के पदाधिकारियों, सरकारी एवं निजी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं तथा आम नागरिकों की सहभागिता से एक विशाल प्रभात फेरी निकाली गई। यह प्रभात फेरी रामकृष्णनगर के प्रमुख मार्गों का भ्रमण करते हुए कदमतला होकर पुनः नेताजीबाग पहुंचकर संपन्न हुई।
इसके बाद भाषा शहीद वेदी पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में समिति की सभानेत्री डॉ. माला शर्मा, सचिव हिमांशु शेखर देबराय, सांस्कृतिक संपादिका कावेरी सरकार, साहित्य संपादिका मंदिरा देबराय, कोषाध्यक्ष मृणाल कांति दास, अरुण चौधुरी, शम्पा माइती, मोलोया चक्रवर्ती, रामकृष्ण विद्यापीठ हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य विश्वजीत नाथ, शिक्षक बाप्पा दास, समाजसेवी कानु दत्त सहित विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।
प्रभात फेरी में रामकृष्ण विद्यापीठ हायर सेकेंडरी स्कूल, जीसी पाल मेमोरियल अकादमी तथा सरदा विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर डॉ. माला शर्मा ने कहा कि 19 मई का दिन बराक घाटी के बंगाली समाज के लिए गर्व और चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा बंगला को सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए 11 युवाओं ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। मातृभाषा से बढ़कर कुछ नहीं होता और जब भाषा संकट में हो, तब उसके संरक्षण के लिए संघर्ष करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
सचिव हिमांशु शेखर देबराय ने कहा कि वर्ष 1961 में शिलचर रेलवे स्टेशन पर 11 युवाओं ने मातृभाषा की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। यह दिन बराक घाटी के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि बंगला विश्व की सबसे मधुर भाषाओं में से एक है तथा एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसी भाषा को वैश्विक सम्मान दिलाया।
कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सामूहिक गीत, नृत्य एवं कविता पाठ प्रस्तुत किया। कालीनगर जीपी के युवा समाजसेवी आलोक चक्रवर्ती ने भाषा शहीदों को समर्पित एक मार्मिक कविता का पाठ किया।
इस अवसर पर कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विषय “बराक घाटी की लोकसंस्कृति” तथा “भाषा शहीद दिवस” रखा गया। वहीं कक्षा आठ से बारह तक के विद्यार्थियों के लिए “19 मई भाषा शहीद दिवस का महत्व” विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित हुई। प्रतियोगिता के विजेताओं को बाद में पुरस्कृत भी किया गया।
दोपहर में शहीदों की स्मृति में नेताजीबाग में तोपध्वनि की गई। वहीं संध्या समय नेताजीबाग स्थित भाषा शहीद वेदी, विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों एवं लोगों के घरों में दीप प्रज्वलित कर भाषा शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।



















