51 Views
“वेदविहीन भारत की परिकल्पना अधूरी” — पूज्य स्वामी श्री विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज
“जम्मू-कश्मीर प्रान्त आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण” — डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय
जम्मू/रजौरी (जम्मू-कश्मीर):
जम्मू-कश्मीर प्रान्त की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक विरासत के अवगाहन हेतु, माननीय उप-राज्यपाल श्री मनोज सिन्हा जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में, गुजरात राज्य के अहमदाबाद स्थित छारोड़ी के दर्शनम् गुरुकुलम् के आचार्यगण एवं ऋषिकुमारों का द्वादश-दिवसीय अध्ययन-पर्यटन प्रवास संचालित है। इसी यात्रा के चतुर्थ दिवस पर रजौरी जनपद स्थित पावन तीर्थ शिवकाशी में, अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर पूज्यपाद स्वामी श्री विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज के दिव्य सानिध्य में संचालित श्री गुरु गंगदेव संस्कृत महाविद्यालय में एक भव्य, दिव्य एवं आध्यात्मिक चेतना से अनुप्राणित कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर, जम्मू-कश्मीर प्रान्त के गुरुकुल एवं मंदिर सेवा योजना के प्रमुख श्रद्धेय डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि यह यात्रा केवल भौगोलिक सीमाओं का परिभ्रमण न होकर, अपितु सनातन वैदिक संस्कृति के संरक्षण, आध्यात्मिक जागरण, आत्मोन्नति एवं जीवन-मूल्यों के परिष्कार का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने यह भी प्रतिपादित किया कि जम्मू-कश्मीर प्रान्त न केवल भौगोलिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, और वर्तमान में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से यह प्रान्त पुनः अपनी प्राचीन वैदिक गौरव-परम्परा की ओर अग्रसर है।
पूज्य स्वामी श्री विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों में स्पष्ट किया कि “वेद के बिना भारत की परिकल्पना अधूरी है।” उन्होंने गुरुकुलों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेद-संरक्षण एवं संवर्धन में संस्कृतनिष्ठ वेदपाठी ब्राह्मणों एवं गुरुकुल परम्परा की अनन्य भूमिका है। साथ ही, उन्होंने वर्तमान में वेद-विकृति के प्रयासों पर चिंता व्यक्त करते हुए समस्त गुरुकुलों के मध्य समन्वय एवं सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे सनातन परम्परा अक्षुण्ण बनी रहे।
इस कार्यक्रम में पूज्य स्वामी जी के श्रीमुख से प्राप्त प्रेरणादायी एवं कल्याणकारी आशीर्वचनों ने समस्त उपस्थित जनों के हृदय में धर्म, साधना एवं सेवा के प्रति नवचेतना एवं दृढ़ संकल्प का संचार किया। सम्पूर्ण वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु-भक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
कार्यक्रम में दर्शनम् गुरुकुलम् के आचार्य श्री चिन्तन भाई जोशी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पूर्व में जम्मू-कश्मीर के प्रति जो भ्रांतियां थीं, वे इस प्रत्यक्ष अनुभव से पूर्णतः दूर हो गई हैं, और यह यात्रा जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगी।
इस अवसर पर श्री गुरु गंगदेव संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नन्दन झा, आचार्यगण, संत-महात्मागण एवं लगभग 50 से अधिक ऋषिकुमारों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
समग्र कार्यक्रम आध्यात्मिक चेतना, वैदिक संस्कृति एवं राष्ट्रधर्म के पुनर्जागरण की दिशा में एक सशक्त एवं प्रेरणादायी पहल के रूप में सम्पन्न हुआ।





















