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असम प्रदेश तैलिक साहू महासभा ने गुवाहाटी में ऐतिहासिक राष्ट्रीय बैठक आयोजित की, अगली बैठक जबलपुर में
असम प्रदेश तैलिक साहू महासभा के अध्यक्ष पूर्व जज कमलेश कुमार गुप्ता ने बताया कि अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा तेली जाति की सबसे पुरानी और सबसे अधिक शक्तिशाली सामाजिक संस्था है। संस्था बनाने का प्रयास 1909 में पटना के बाढ़ में हुआ और प्रथम अधिवेशन 1912 में आजमगढ़ के वकील बाबू महावीर प्रसाद, मुंगेर के रायबहादुर देवनन्दन प्रसाद सिंह जमींदार और छपरा के पूर्व जज धर्मनाथ के नेतृत्व में वाराणसी में हुआ। इस संस्था के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष महाराष्ट्र सरकार में 18 वर्षों तक मंत्री रहे इंजिनियर जयदत्त क्षीरसागर , राष्ट्रीय महासचिव उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक सेवा अधिकारी रामलाल गुप्ता, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पटना के अमरेंद्र कुमार साहू, असम प्रदेश के सलाहकार विधायक तथा मंत्री व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली व विधायक डॉ विजय कुमार गुप्ता, अध्यक्ष पूर्व जज कमलेश कुमार गुप्ता, अधिकारी व कर्मचारी प्रकोष्ठ चेयरमैन सत्य नारायण साहू, महामंत्री उमेश कुमार साह, कोषाध्यक्ष मुन्ना कुमार साहू हैं।
बाद के वर्षों में दरभंगा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ हरिप्रसाद साहू, पश्चिम बंगाल के कृषि वैज्ञानिक व चाय उत्पादक शैलेन्द्र कुमार निर्मल, उड़ीसा सरकार के मंत्री और एडवोकेट जनरल दीनबंधु साहू, महाराजा श्रीशचंद्र, आचार्य ए एम माकड़े गुरु जी, महाराष्ट्र के पूर्व सांसद श्रीमती केशरबाई क्षीरसागर, मदुराई के ए परमशिवम् चेट्टियार, उच्चतम न्यायालय के वकील चरणलाल साहू, लखनऊ के सांसद रामनारायण साहू, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग सदस्य साहू अक्षय भाई, कलकत्ता के भगवानदास आर्य, झारखंड के मुख्यमंत्री तथा उड़ीसा के गवर्नर रघुबर दास, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, असम के चार स्वतंत्रता सेनानी क्रमशः इंद्र प्रसाद साहू, रघुनाथ साहू, महावीर साहू और शिव प्रसाद सहित अनेकों महानुभावों ने अपना योगदान दिया।
यह तेली जाति की संस्था है जिसके अंतर्गत राठौर, मोदी, मोध , गांधी, घांची, गुप्ता, शाह, साहा, साह, साव, साहू, चौधरी, बनिक, बनिया, पाल, दास, सोलंकी, गहलोत, गंडला तेली, रोगनदार, चेट्टियार, पाटिल, हजारे, वानखेडे, क्षीरसागर, भाटी, बावनकुले, आदि अनेकों उपनाम हैं। पूरे भारत में लगभग सभी महत्वपूर्ण और धार्मिक स्थलों पर तेली जाति द्वारा बनवाये गये धर्मशालाएं, अस्पताल, बावड़ी, छात्रावास, आदि हैं जो सभी जातियों के लिए बहुत कम शुल्क पर उपलब्ध हैं। केरल के तिरुवनंतपुरम और पास में मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय भी हैं। अकेले उदयपुर में सात, अहमदाबाद में कई, उज्जैन में तीन, हरिद्वार में दो बड़े धर्मशालाएं हैं। इतिहास प्रसिद्ध तेली जाति के व्यक्तित्व में सम्राट विक्रमादित्य, बाबा गोरखनाथ, भामाशाह, संत जगनाडे, जगन्नाथ को खिचड़ी खिलाने वाली माता कर्मा देवी, मीनाक्षी मंदिर, कन्नगी देवी, ग्वालियर तेली मंदिर, महात्मा गांधी व भारतवर्ष के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हैं।
गुवाहाटी के डिस्ट्रिक्ट लाइब्रेरी ऑडिटोरियम, पी डब्लू डी कन्वेंशन सेंटर ऑडिटोरियम और कल्याण भवन गणेशगुरी में पूरे पूर्वोत्तर में पहली बार एक ऐसा ऐतिहासिक आयोजन किया गया जिसमें पूरे भारतवर्ष, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मॉरिशस से पधारे करीब 80 पदाधिकारियों और राजनेताओं ने शिरकत की और असम की भूरी भूरी प्रशंसा भी की। इस आयोजन में ब्राह्मण, क्षत्रिय, अन्य वैश्य, शुद्र, बौद्ध, सिक्ख, आदिवासी और जैन संप्रदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया गया था। असम सरकार के माननीय मुख्यमंत्री डॉ हिमंता बिस्वा शर्मा ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की और हौसला भी बढ़ाया। माननीय मंत्री पीजूष हजारिका और माननीय मंत्री बिमल बोरा ने भी अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।
असम में तेली जाति की अधिक संख्या चायबगानों में रहती है। अन्य जगहों के लोग असंगठित क्षेत्रों में काम करते हैं या छोटे व्यवसाय करते हैं। केवल कुछ तेलियों की स्थिति थोड़ी अच्छी है और अलग अलग सरकारी गैर सरकारी प्रतिष्ठानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
ऐसा आयोजन भारतवर्ष के अलग अलग जगहों पर होता रहता है। अब ये आयोजन मध्यप्रदेश के जबलपुर में होने जा रहा है।
प्रधानमंत्री जी के 2047 तक विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने का जिम्मा हम सभी भारतीयों का है। असम प्रदेश तैलिक साहू महासभा भी सरकार के साथ मिलकर और सरकार के कार्यों में सहयोग देते हुए सभी का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए प्रयत्नशील है। यह संस्था जातिगत होते हुए भी केवल जाति में बंधकर नहीं रहती, किसी जाति से कोई मनमुटाव या प्रतिस्पर्धा नहीं करती, केवल अपने जाति के अधिकारों और सुविधाओं के बारे में सजग रहना चाहती है ताकि शोषण न हो। यह सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास के मंत्र पर अग्रसर हो रही है।





















