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ईद-उल-अज़हा पर गौमाता की कुर्बानी से परहेज़ करने की अपील मौलाना शरीमुल हक लस्कर ने दिया सौहार्द का संदेश

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ईद-उल-अज़हा पर गौमाता की कुर्बानी से परहेज़ करने की अपील मौलाना शरीमुल हक लस्कर ने दिया सौहार्द का संदेश
प्रीतम दास हाइलाकांडी, २५ मई:
पवित्र ईद-उल-अज़हा के अवसर पर बराक घाटी में सांप्रदायिक सौहार्द पारस्परिक सम्मान और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से उत्तर-पूर्वांचल अहले सुन्नत वल जमात के मुख्य सलाहकार मौलाना शरीमुल हक लस्कर ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए ईद-उल-अज़हा पर गौमाता की कुर्बानी से परहेज़ किया जाना चाहिए।रविवार को आयोजित एक खाद्य सामग्री वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मौलाना शरीमुल हक लस्कर ने कहा कि भारत अनेक धर्मों भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों का देश है। इसी विविधता में देश की वास्तविक सुंदरता निहित है। इसलिए समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए एक-दूसरे की धार्मिक मान्यताओं और भावनाओं का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस्लाम की मूल शिक्षा मानवता सहानुभूति दया और पारस्परिक सम्मान है। एक सच्चा मुसलमान कभी ऐसा कार्य नहीं कर सकता जिससे किसी अन्य समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचे। धार्मिक कर्तव्यों के साथ साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाना भी उतना ही आवश्यक है।मौलाना  सारीमलशरीमुल हक लस्कर ने आगे कहा कि ईद-उल-अज़हा का वास्तविक संदेश त्याग और समर्पण है। कुर्बानी का महत्व किसी विशेष पशु में नहीं बल्कि व्यक्ति की तक़वा आत्मबलिदान और अल्लाह के प्रति निष्ठा में निहित है। इसलिए सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने वाले निर्णयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।अपने संबोधन में उन्होंने गौमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने के पक्ष में भी विचार व्यक्त किए। उनका कहना था कि देश की एक बड़ी आबादी की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएँ गाय से जुड़ी हुई हैं और उन भावनाओं का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
मौलाना के इस वक्तव्य के सार्वजनिक होने के बाद बराक घाटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उनकी अपील को सकारात्मक पहल के रूप में देख रहे हैं। अनेक लोगों का मानना है कि वर्तमान समय में जब विभिन्न कारणों से सामाजिक विभाजन और तनाव का वातावरण बनता है तब सौहार्द और सह-अस्तित्व के पक्ष में इस प्रकार का संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक एकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज के विकास और शांति के लिए सभी समुदायों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को और अधिक मजबूत करना आवश्यक है।
ईद-उल-अज़हा के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में गरीब असहाय और वंचित लोगों के बीच खाद्य सामग्री का वितरण भी किया गया। आयोजकों ने बताया कि मानव सेवा के माध्यम से प्रेम सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश फैलाना ही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।कार्यक्रम के अंत में देश समाज और समस्त मानवता की शांति प्रगति और कल्याण के लिए विशेष दुआ और प्रार्थना की गई। उपस्थित लोगों ने समाज में शांति सौहार्द और पारस्परिक सम्मान बनाए रखने का संकल्प भी व्यक्त किया।

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