कालबैशाखी के तांडव से तहस-नहस हाइलाकांदी, जनजीवन अस्त-व्यस्त
प्रीतम दास हाइलाकांदी, २१अप्रैल:
प्रबल कालबैशाखी तूफान के प्रकोप से हाइलाकांदी जिले का विस्तृत क्षेत्र तहस-नहस हो गया। सोमवार तड़के लगभग चार बजे अचानक आए इस तूफान ने कुछ ही क्षणों में कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। विशेष रूप से आयनाखाल चाय बागान क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है ऐसा स्थानीय सूत्रों से पता चला है।तूफान के तांडव में अनेक लोगों के घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए। कहीं विशालकाय पेड़ घरों पर गिर पड़े, तो कहीं तेज हवाओं के कारण टिन की छतें उड़ गईं और देखते ही देखते मकान मलबे में तब्दील हो गए। इस अचानक आई आपदा से भयभीत लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकल आए। कई लोगों ने पूरी रात खुले आसमान के नीचे असुरक्षा और अनिश्चितता के बीच बिताई।

सबसे भयावह स्थिति आयनाखाल बागान क्षेत्र में देखने को मिली। प्रारंभिक आकलन के अनुसार यहां लगभग २०० से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई परिवार रातों-रात बेघर हो गए हैं। बच्चे और बुजुर्गों के साथ प्रभावित लोग भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।वहीं तूफान के कारण जिले की सड़क संपर्क व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई। आयनाखाल से रामकृष्णनगर को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर दो बड़े पेड़ उखड़कर गिर जाने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। इससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और आपात सेवाएं भी बाधित हुईं। हालांकि स्थिति को जल्द सामान्य करने के लिए प्रशासन सक्रिय हो गया। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ (SDRF) की टीम मौके पर पहुंची और सड़क पर गिरे पेड़ों को काटकर हटाया जिससे यातायात बहाल करने का काम शुरू किया गया। उनकी तत्परता से कुछ ही समय में आंशिक रूप से संपर्क व्यवस्था बहाल हो गई जिससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।स्थानीय निवासियों के अनुसार इस प्रकार का भीषण तूफान उन्होंने लंबे समय बाद देखा है। तूफान की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ ही मिनटों में सामान्य जनजीवन ठप हो गया और हर ओर तबाही का मंजर नजर आया।इधर प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही सड़कों को शीघ्र साफ कर संपर्क व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने का कार्य भी तेजी से जारी है।हालांकि प्रभावित लोगों ने शीघ्र सरकारी सहायता राहत और पुनर्वास की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन के ये प्रयास कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं और प्रभावित लोग कब तक अपने सामान्य जीवन में लौट पाते हैं।




















