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महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में मुखर हुए उधारबंद विधायक राजदीप ग्वाला, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना

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महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में मुखर हुए उधारबंद विधायक राजदीप ग्वाला, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना
विशेष प्रतिनिधि गुवाहाटी, 26 मई : असम विधानसभा के सोलहवें अधिवेशन के चौथे दिन, मां काथाकांति की पुण्यभूमि से निर्वाचित उधारबंद के विधायक राजदीप ग्वाला ने माननीय मंत्री श्रीमती अंजता नियोग द्वारा प्रस्तुत महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में जोरदार और प्रभावशाली स्वर उठाया। विधानसभा में अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सम्मान तथा उनकी राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथ मनुस्मृति के तृतीय अध्याय के 56वें श्लोक से की, जिसकी रचना महर्षि मनु द्वारा की गई थी—
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥”
इस श्लोक का अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जहां महिलाओं का सम्मान और आदर किया जाता है, वहां देवताओं का वास होता है और समृद्धि का संचार होता है; जबकि जहां महिलाओं का सम्मान नहीं किया जाता, वहां सभी शुभ कार्य और धार्मिक कर्म निष्फल हो जाते हैं।
इस महान संदेश के साथ अपने वक्तव्य का प्रारंभ करते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन का भी उल्लेख किया— “जिस देश या समाज में महिलाओं को सम्मान नहीं दिया जाता, वह समाज कभी महान नहीं बन सकता और भविष्य में भी नहीं बन पाएगा।” उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक समाज में भी यह विचार उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।
महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में बोलते हुए विधायक राजदीप गोयाला ने कहा कि यह विधेयक इस बात का प्रमाण है कि असम सरकार महिलाओं के अधिकार, संरक्षण और सशक्तिकरण को कितनी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ देखती है।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने देश और समाज के लिए असाधारण योगदान देने वाली महान महिलाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना शहीद कनकलता बरुआ और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को स्मरण किया, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 1961 के बराक घाटी भाषा आंदोलन की शहीद कमला भट्टाचार्य को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने भाषाई अधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
विधायक राजदीप ग्वाला ने कहा कि यदि महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो केवल समाज ही नहीं, बल्कि राज्य और देश भी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है। उन्होंने विशेष रूप से माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और माननीय मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के निर्णायक एवं सुदृढ़ नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि महिलाओं के उत्थान के लिए जिस प्रकार विभिन्न विकासात्मक योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू किया जा रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है।
उन्होंने आगे कहा कि असम सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को प्राप्त हुआ है। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की उल्लेखनीय सफलता में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में असम सरकार अरुणोदय योजना, निजुत मोइना योजना, महिला उद्यमिता कार्यक्रम तथा अन्य कई जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
अपने वक्तव्य में उन्होंने असम के चाय उद्योग में महिलाओं के अतुलनीय योगदान का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चाय की पत्तियों को तोड़ने से लेकर उसके उत्पादन और प्रसंस्करण तक, महिलाओं की सक्रिय और समर्पित भागीदारी इस उद्योग की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि असम के चाय उद्योग की रीढ़ महिलाएं हैं और यदि उनका योगदान न हो तो यह उद्योग गंभीर संकट का सामना कर सकता है। उन्होंने चाय उद्योग से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी सभी महिलाओं के प्रति अपनी श्रद्धा और आभार व्यक्त किया।
उन्होंने असम के चाय जनजाति समुदाय से पहली डॉक्टर बनने वाली मार्टिना टुडू को भी बधाई देते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया। साथ ही उन्होंने हाल ही में भारत सरकार द्वारा पद्म पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती पोखिला लेकथपी का भी उल्लेख किया, जिन्हें कार्बी लोक संगीत और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण में उनके असाधारण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
अपने भाषण के समापन पर उन्होंने एक प्रसिद्ध अंग्रेजी कहावत— “Behind every successful man there is a woman” —का उल्लेख करते हुए कहा कि आज समय बदल रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यद्यपि वर्तमान में असम विधानसभा में महिला प्रतिनिधियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इस विधेयक के माध्यम से उनकी भागीदारी और उपस्थिति को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह कहावत भी बदली जा सकती है— “Behind every successful woman there is a man.”
विधायक राजदीप ग्वाला का यह प्रभावशाली वक्तव्य केवल महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में विकसित हो रहे एक सशक्त, समावेशी और महिला-केंद्रित असम की व्यापक सोच और दृष्टिकोण को भी स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है।

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