फॉलो करें

माध्यमिक परीक्षा के निराशाजनक परिणाम पर चिंतन: जिम्मेदारी किसकी? गोलक ग्वाला 

23 Views

माध्यमिक परीक्षा के निराशाजनक परिणाम पर चिंतन: जिम्मेदारी किसकी? गोलक ग्वाला 

हाल ही में घोषित माध्यमिक परीक्षा के निराशाजनक परिणाम ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संदर्भ में सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र से जुड़े एक जागरूक नागरिक गोलक ग्वाला ने अपनी स्पष्ट राय व्यक्त करते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य किसी को व्यक्तिगत रूप से आहत करना नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी की ओर ध्यान आकर्षित करना है।

उनके अनुसार, विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में चार प्रमुख स्तंभ—सरकार, शिक्षक, अभिभावक और स्वयं छात्र—सक्रिय भूमिका निभाते हैं। लेकिन वर्तमान समय में इन चारों स्तरों पर कहीं न कहीं उदासीनता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की कुछ व्यावहारिक विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज “सर्व शिक्षा” के नाम पर बिना पर्याप्त मूल्यांकन के प्रमोशन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। कई विद्यालयों में पढ़ाई से अधिक ध्यान मिड-डे मील पर केंद्रित हो गया है। अभिभावकों का एक वर्ग बच्चों को स्कूल भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेता है, जबकि पढ़ाई पर अपेक्षित निगरानी नहीं रखता।

शिक्षकों की भूमिका पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना है कि कुछ मामलों में शिक्षक भी केवल औपचारिक जिम्मेदारी निभाकर छात्रों को विदा कर देते हैं। वहीं, विद्यालय प्रशासन का बड़ा हिस्सा कागजी कार्यवाही और सरकारी निर्देशों के अनुपालन में ही उलझा रहता है, जिससे वास्तविक शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित होती है।

विद्यालय प्रबंधन समितियों की प्राथमिकताओं पर भी उन्होंने चिंता जताई। उनके अनुसार, कई जगहों पर विकास निधि और मिड-डे मील के बजट पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जबकि अनुशासन, उपस्थिति और पढ़ाई जैसे मूल मुद्दे गौण हो जाते हैं।

छात्रों के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आज के बच्चों में बिना नियंत्रण के स्वतंत्रता की प्रवृत्ति बढ़ रही है। घर और स्कूल—दोनों जगह अनुशासन की कमी दिख रही है। ट्यूशन पर अत्यधिक निर्भरता भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, जिसे कई लोग व्यवसाय के रूप में देख रहे हैं।

इस बीच उन्होंने अतीत के एक प्रेरणादायक उदाहरण का उल्लेख किया। उन्होंने डी.एन.एच.एस. स्कूल के पूर्व प्रधानाचार्य विमल नाथ सर का स्मरण करते हुए कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद उन्होंने विद्यालय को सफलतापूर्वक संचालित किया। आज जबकि सभी स्तरों पर समान विचारधारा का समन्वय है, तब भी अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं मिल पा रहे—यह गंभीर अध्ययन का विषय है।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि व्यक्तिगत सुविधा, टकराव से बचने की मानसिकता और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति के साथ किसी भी संस्थान का विकास संभव नहीं है।

अंत में उन्होंने सभी पक्षों से आत्ममंथन का आह्वान किया—

  • सरकार को शैक्षणिक ढांचे के समग्र विकास पर ध्यान देना होगा,
  • शिक्षकों को अपने पेशे को केवल नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के रूप में निभाना होगा,
  • अभिभावकों को विद्यालय और शिक्षा व्यवस्था का सम्मान करते हुए बच्चों की पढ़ाई में सक्रिय भागीदारी करनी होगी,
  • और छात्रों को अपने माता-पिता के त्याग और सपनों का सम्मान करते हुए गंभीरता से अध्ययन करना होगा।

गोलक ग्वाला ने अपील करते हुए कहा, “आइए हम सब अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें, तभी भविष्य की पीढ़ी को सही दिशा मिल सकेगी।”

Share this post:

Leave a Comment

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल