शिलचर शंकर मठ एवं मिशन में आदि शंकराचार्य जयंती धूमधाम से मनाई गई, ‘ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या’ का संदेश गूंजा
शिलचर, मंगलवार:
शिलचर के सोनाई रोड स्थित महाप्रभु श्रीरामकृष्ण शंकर मठ एवं मिशन में जगतगुरु आदि शंकराचार्य की जयंती सनातन परंपरा के अनुसार पूरे दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। कार्यक्रम के दौरान ‘ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या’ का उनका अमर संदेश शहर के सनातनी समाज में पुनः गूंज उठा।
सुबह तड़के ही मठ परिसर में पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद आदि शंकराचार्य के जीवन और दर्शन पर विस्तृत चर्चा सभा आयोजित की गई। शंकर स्तुति, शिव स्तोत्र, भगवद्गीता पाठ, भजन-कीर्तन और शांति संदेशों के माध्यम से भक्तिमय वातावरण बना रहा। अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा, जो शिलचर के सनातनी समाज की एकता और धार्मिक आस्था का परिचायक बना।
मठ के कर्माध्यक्ष श्रीमंत विज्ञानानंद ब्रह्मचारी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि “ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या” का सिद्धांत आदि शंकराचार्य की महान आध्यात्मिक अनुभूति का सार है। उन्होंने कहा कि संसार की समस्त वस्तुएं नश्वर हैं और अंततः केवल ब्रह्म ही शाश्वत सत्य है। समय सब कुछ नष्ट कर देता है, जबकि परम सत्य सदैव विद्यमान रहता है।
उन्होंने आगे बताया कि मात्र 32 वर्ष के अल्प जीवन में आदि शंकराचार्य ने भारतभर में मठ-मिशनों की स्थापना कर हिंदू धर्म को नई ऊर्जा प्रदान की। उनके द्वारा स्थापित वैदिक सनातन परंपरा ने आगे चलकर रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य सहित अनेक संत-महापुरुषों को प्रेरणा दी। सनातन धर्म के संरक्षण और विस्तार में उनका योगदान अतुलनीय है।
इस अवसर पर शिलचर भोलागिरी आश्रम के अध्यक्ष स्वामी भुवनेश्वरानंद गिरि महाराज, श्रीमंत आत्मानंद ब्रह्मचारी महाराज सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




















