श्री श्री भोलानंदगिरि महाराज की 97वीं तिरोधन तिथि श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाई गई
शिलचर (असम), गुरुवार। शिलचर के रांगिरखाड़ी स्थित श्री श्री भोलागिरि आश्रम में गुरुवार को महान संत श्री श्री भोलानंदगिरि महाराज की 97वीं तिरोधन तिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर आश्रम में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों और साधु-संतों ने भाग लेकर महाराज के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित की।
आश्रम के अध्यक्षा स्वामी भुवनेश्वरानंद गिरी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सदैव से संतों और महापुरुषों की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या और सहनशीलता का प्रतीक होता है, जो समाज को सच्चे मार्ग की दिशा दिखाते हैं। श्री श्री भोलानंदगिरि महाराज भी ऐसे ही महान संत थे, जिनका जीवन परोपकार, करुणा और सर्वभूते प्रेम की भावना से ओतप्रोत था। उन्होंने कहा कि महाराज का सबसे बड़ा गुण यह था कि वे सभी प्राणियों से समान प्रेम करते थे और दूसरों के लिए ही अपना जीवन समर्पित कर दिया था।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 5 बजे मंगल आरती से हुई। इसके पश्चात सुबह 8 बजे शिव रुद्राभिषेक और 10 बजे विशेष पूजा का आयोजन किया गया। दोपहर 12 बजे साधु भंडारा का आयोजन कर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। संध्या समय नित्य उपासना और सत्संग के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस आयोजन को सफल बनाने में पुजारी स्वप्न चक्रवर्ती और हीरक भट्टाचार्य सहित पंकज दे, भोलनाथ चौधरी, सौमेन दत्त चौधरी, संतोष राय, सुमित पाल, वेदव्रत राय, ब्यूटी दत्त, शंकर दास, सौरभ चंद और सুশांत सेन समेत कई श्रद्धालुओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।




















