समाज  संगठित  हो
इकट्ठा होकर एक साथ रहना ही समाज कहलाता है। जबतक हम बिखरे रहेंगे तबतक उत्थान से पिछड़े रहेंगे अर्थात जबतक हम जाति – प्रजाति, भाषा,अमीरी- गरीबी, ऊँच – नीच, स्वार्थी विचार वाले मतभेदों मे बंटे रहेंगे तबतक  समाज मे हमारा उचित महत्व नही मिल पाएगा। पूरी तरह से संगठित होकर एकत्व भाव से हमे आगे बढ़ने की आवश्यकता है वरना बिखरे भाव को अन्य लोग फायदा उठाते रहेंगे। सबसे पहले हमारे समाज के उन विचारों, अधिकारो को एकत्रित करने की परम आवश्यकता है जिनसे हमारा असम राज्य का उत्थान हो साथ ही साथ वृहत्तर असमीया संस्कृति और वृहत्तर असमीया समाज का गठन हो।कहने का तात्पर्य यह है कि जिस भूमि को हमारे दादा, परदादा ने  कई  दशकों वर्ष पहले  माथे से लगाया और अपने परिश्रम से यहाँ के लोगों के साथ मिलकर सिंचा, अब हमारे लिए उस जन्मभूमि व कर्मभूमि तथा अपनत्व भूमि असम राज्य की उत्थान तथा सुरक्षा के लिए   रात – दिन एक करना पड़े या सर्वस्व न्योछावर करना पड़े तो हमें सदैव तत्पर रहना चाहिए। सर्वप्रथम अपने वृहत्तर  समाज को संगठित एवं उत्थान के लिए हमे एक सशक्त मंच की आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि मंच एक ऐसा प्लेटफार्म होता है जहाँ से सर्वसम्मति से सदविचार दूर – दूर तक फैलता है तथा  विभिन्न जाति, जन गोष्ठी आदि समाज अपनत्व के भाव से जुड़ते जाते है और एक वृहत्तर सशक्त समाज का गठन होता है जिसमें हम सभी प्रेम भाव से रहते हुए अपने आप को सुरक्षित महसूस करते है। एक सशक्त मंच के अभाव मे हमारे सदविचारो को आदान –  प्रदान करने मे कठिनाई आती है इसलिए हमे आज संगठित होने कि जरूरत है ताकि हमारा वृहत्तर समाज अपनत्व की भावना से ओतप्रोत होकर सुरक्षित महसूस करते हुए अपने समाज तथा असम और असम की संस्कृति की उत्थान के लिए अनवरत कार्य करते रहे।
पवन कुमार शर्मा (शिक्षक)
दुमदुमा (असम)
मो.नं. 9954327677