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हाइलाकांदी में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने हेतु संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर

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हाइलाकांदी में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने हेतु संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर
कृषि अधिकारियों के लिए वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन विषयक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
प्रीतम दास हाइलाकांदी, ८ मई :
कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं दीर्घकालिक टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से हाइलाकांदी में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। गुरुवार को कृषि विभाग हाइलाकांदी के प्रशिक्षण हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय था  संतुलित उर्वरक उपयोग एवं वैज्ञानिक आधारित पोषक तत्व प्रबंधन। कार्यक्रम का आयोजन आईसीएआर-केवीके हैलाकांडी तथा जिला कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा की उर्वरता तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों में जागरूकता बढ़ाने तथा कृषि अधिकारियों को आधुनिक वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन के प्रति अधिक दक्ष बनाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए कृषि प्रसार अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान मृदा स्वास्थ्य आधारित उर्वरक प्रयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक एवं जैव-आदानों के उपयोग को बढ़ावा रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक प्रयोग में कमी तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित मात्रा एवं सही समय पर उर्वरक प्रयोग करने से न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि मृदा की गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहती है।कार्यक्रम का समन्वयन आईसीएआर-केवीके हाइलाकांदी के प्रमुख डॉ. सौरभ शर्मा तथा जिला कृषि अधिकारी (डीएओ) मनोज बैश्य द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा टिकाऊ कृषि व्यवस्था की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखते हुए कृषि को आगे बढ़ाना भी आवश्यक है। संतुलित उर्वरक उपयोग के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।इसके अतिरिक्त किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों को पहुँचाने, खेत स्तर पर वैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराने तथा कृषि प्रसार व्यवस्था को अधिक सशक्त बनाने पर भी विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसानों को जागरूक एवं प्रशिक्षित बनाने में कृषि अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।कुल ५५ प्रतिभागियों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में एडीओ राजीबुल हक मुल्ला एवं आकाशदीप करिगप्सा भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में एक संवादात्मक चर्चा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने कृषि क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं, चुनौतियों तथा संभावित समाधानों पर विचार-विमर्श किया।सम्पूर्ण कार्यक्रम के माध्यम से जिले के किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग वैज्ञानिक कृषि आदान प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

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