फॉलो करें

बराक नदी की भीषण कटाव से त्रस्त बड़खला के उत्तर बुड़िबाइल इलाके के लोग, नेताओं की निष्क्रियता पर फूटा गुस्सा

262 Views

काछार जिला के बड़खोला विधानसभा अंतर्गत उत्तर बुड़िबाइल ग्राम पंचायत के निवासियों पर इन दिनों बराक नदी की आक्रामक कटाव ने कहर बरपा रखा है। नदी के कटाव की वजह से लोगों के आशियाने, खेत-खलिहान और जनजीवन तेजी से बर्बाद हो रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस भयावह स्थिति पर पूरी तरह मौन हैं।

स्थानीय विधायक मिसबाहुल इस्लाम लश्कर ने एक बार दौरा कर मात्र औपचारिकता निभा दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनके वादों का धरातल पर कोई असर नहीं दिख रहा, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

नदी कटाव की लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं मिलने पर अब ग्रामीणों ने सभी राजनीतिक दलों के नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कटाव प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और विभागीय मंत्री से अविलंब हस्तक्षेप की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल मानसून के समय बराक नदी के किनारे बसे गांवों में भय और अनिश्चितता का माहौल छा जाता है। लोग रातभर इस डर में रहते हैं कि कब उनका घर नदी में समा जाएगा। प्रशासनिक उपेक्षा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

इस दिन के निरीक्षण में ग्राम पंचायत अध्यक्ष मदनमोहन पाल, समूह सदस्य प्रतिनिधि जमील अहमद चौधरी, तृणमूल कांग्रेस के जिला महासचिव अब्दुल बासित लश्कर, समूह प्रतिनिधि नजीर अहमद, समाजसेवी बप्पा लश्कर और यूडीएफ के कछार जिला महासचिव मोहम्मद फैसल अहमद बड़भुइयां समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

Share this post:

Leave a Comment

खबरें और भी हैं...

इंडियन आर्मी ने तिनसुकिया में नव रूपांतर चिल्ड्रन होम के बच्चों के साथ होली मनाई तिनसुकिया: 03 मार्च 2026 को, रेड शील्ड गनर्स ने, स्पीयर कॉर्प्स के अंडर, असम के रूपाई में चिल्ड्रन होम को चमकीले रंगों और दिल को छू लेने वाली मुस्कान से भर दिया, क्योंकि उन्होंने अपनी लगातार कम्युनिटी आउटरीच पहल के तहत वहां रहने वाले बच्चों के साथ रंगों का त्योहार मनाया। जब सैनिक और बच्चे एक साथ आए और न केवल रंगों और मिठाइयों से, बल्कि सच्चे प्यार और हंसी-मजाक से भी होली मनाई, तो “अनाथालय में खुशियों के रंग भर गए”। 8 से 17 साल के कुल 20 बच्चों ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया, उनके उत्साह से पूरा परिसर जगमगा उठा। रंगों के बिखरने के साथ होली शुरू हुई, जो जल्द ही बेफिक्र मस्ती और खुशी भरी बातचीत के पलों में बदल गई। आर्मी के जवानों ने बच्चों के साथ अच्छा समय बिताया—खेलते हुए, बातें करते हुए, हिम्मत बढ़ाते हुए और सुनते हुए—यह पक्का करते हुए कि हर बच्चे को अहमियत महसूस हो और उसे अपनाया जा रहा हो। यह त्योहार प्यार और अपनेपन का प्रतीक बन गया, जहाँ यूनिफॉर्म चमकीले रंगों के साथ मिल जाती थी और दिल बिना किसी रुकावट के जुड़ जाते थे। बातचीत के दौरान, होली के एकता, उम्मीद और पॉजिटिविटी के त्योहार के महत्व को शेयर किया गया, जिससे मेलजोल और साथ रहने की वैल्यूज़ को मज़बूती मिली। सभी को मिठाइयाँ बाँटी गईं, जिससे दिन में मिठास आई और इंडियन आर्मी और लोकल कम्युनिटी के बीच का रिश्ता और मज़बूत हुआ। बच्चों की मुस्कान, हँसी और चमकते चेहरों ने होली का असली मतलब दिखाया—प्यार फैलाना, खुशियाँ बाँटना और एक बड़े परिवार की तरह साथ खड़े होना। इस पहल ने कम्युनिटी वेलफेयर, युवाओं से जुड़ाव और असम के लोगों के साथ भरोसे के रिश्ते को मज़बूत करने के लिए इंडियन आर्मी के पक्के कमिटमेंट को फिर से पक्का किया।

Read More »

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल