फॉलो करें

बाराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित करने की मांग तेज अधिवक्ता परिषद ने मुख्य न्यायाधीश को भेजा विस्तृत ज्ञापन

36 Views

बाराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित करने की मांग तेज
अधिवक्ता परिषद ने मुख्य न्यायाधीश को भेजा विस्तृत ज्ञापन

शिलचर, 20 मई : बाराक घाटी में की स्थायी बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर अधिवक्ता परिषद, कछार जिला इकाई, शिलचर ने बुधवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश को एक विस्तृत ज्ञापन डाक के माध्यम से प्रेषित किया। ज्ञापन में दक्षिण असम के लोगों की लंबे समय से चली आ रही न्यायसंगत मांग को प्रमुखता से उठाया गया है।

संगठन की ओर से अध्यक्ष अधिवक्ता देवाशीष सोम, सचिव अधिवक्ता अमरेंद्र पाल, सह-सभानेत्री अधिवक्ता सुस्मिता पुरकायस्थ, सह-अध्यक्ष अधिवक्ता जयदीप विश्वास, कोषाध्यक्ष अधिवक्ता रत्नांकुर भट्टाचार्य, संयुक्त सचिव अधिवक्ता शिखा नाथ तथा सहायक सचिव अधिवक्ता सिद्धार्थ चक्रवर्ती ने हस्ताक्षर किए।

ज्ञापन में कहा गया है कि कछार, श्रीभूमि (करीमगंज), हैलाकांडी तथा समीपवर्ती डिमा हासाओ जिले भौगोलिक रूप से ब्रह्मपुत्र घाटी से अलग-थलग हैं। बरैल पर्वतमाला तथा राष्ट्रीय राजमार्ग-6 पर निर्भर अस्थिर संपर्क व्यवस्था के कारण विशेषकर वर्षाकाल में बाराक घाटी का गुवाहाटी से संपर्क बार-बार बाधित हो जाता है। इसके चलते रिट याचिका, जमानत आवेदन तथा अन्य महत्वपूर्ण मामलों में लोगों को समय पर हाईकोर्ट पहुंचने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे न्याय प्राप्ति का संवैधानिक अधिकार प्रभावित होता है।

अधिवक्ता परिषद ने यह भी उल्लेख किया कि बाराक घाटी से गुवाहाटी तक लंबी यात्रा, आवास, भोजन तथा अधिवक्ताओं की फीस का भारी खर्च सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर वादकारियों के लिए अत्यंत कठिन साबित होता है। आर्थिक सीमाओं के कारण अनेक लोग निचली अदालतों के फैसलों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करने से भी वंचित रह जाते हैं। इससे न्याय व्यवस्था में व्यावहारिक रूप से असमानता की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

ज्ञापन में कहा गया कि शिलचर राज्य के दूसरे सबसे बड़े शहरी केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। व्यापार, शिक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों के विस्तार के साथ रिट याचिकाओं, वाणिज्यिक मामलों तथा आपराधिक अपीलों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में शिलचर में हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित होने से मामलों के शीघ्र निपटारे में सहायता मिलेगी और आम लोगों को न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी।

संगठन ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 तथा 39(क) का उल्लेख करते हुए कहा कि त्वरित न्याय और न्याय तक समान पहुंच प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। किंतु वर्तमान केंद्रीकृत न्यायिक व्यवस्था दक्षिण असम के लोगों के लिए व्यवहारिक रूप से भेदभावपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर रही है।

ज्ञापन में बाराक घाटी की विशिष्ट भाषाई, सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का भी उल्लेख किया गया। भूमि विवाद, स्थानीय परंपराओं और क्षेत्रीय प्रशासनिक विषयों से जुड़े मामलों में स्थानीय परिस्थितियों की समझ अत्यंत आवश्यक बताई गई। अधिवक्ता परिषद का मत है कि शिलचर में स्थायी बेंच स्थापित होने से स्थानीय अधिवक्ता समुदाय और न्यायिक प्रणाली अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगी।

इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में कहा गया कि यद्यपि वर्चुअल सुनवाई की व्यवस्था लागू है, लेकिन इस क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं की अस्थिरता और डिजिटल असमानता के कारण ऑनलाइन सुनवाई हमेशा प्रभावी नहीं हो पाती। कई मामलों में अदालत में प्रत्यक्ष उपस्थिति आज भी अनिवार्य बनी हुई है। इसलिए स्थायी बेंच की स्थापना वर्तमान समय की व्यावहारिक आवश्यकता है।

ज्ञापन के अंत में माननीय मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया गया कि वे बाराक घाटी के लोगों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर सकारात्मक विचार करते हुए शिलचर में गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित करने हेतु आवश्यक पहल करें तथा इस संबंध में राज्य सरकार और केंद्रीय कानून मंत्रालय को उपयुक्त अनुशंसा प्रेषित करें।

इस मांग को लेकर अधिवक्ता समुदाय सहित पूरे बाराक घाटी क्षेत्र में नई आशा और सकारात्मक माहौल का संचार हुआ है।

Share this post:

Leave a Comment

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल