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पैलापुल स्थित नेहरू कालेज में रोटरी क्लब द्वारा कंप्यूटर डिप्लोमा प्रमाणपत्र वितरण और जलजनित रोगों पर जागरूकता सभा आयोजित।
चंद्रशेखर ग्वाला लखीपुर, 11 मार्च : कछाड़ जिले के पैलापुल स्थित नेहरू कालेज में बुधवार को रोटरी क्लब ग्रेटर सिलचर और आई क्यु ए सी, नेहरू कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में दो महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें कंप्यूटर एप्लिकेशन के तीन माह के डिप्लोमा कोर्स के समापन पर प्रमाणपत्र वितरण समारोह तथा जलजनित रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष सभा शामिल थी।
रोटरी डिजिटल मिशन के अंतर्गत आयोजित तीन माह के कंप्यूटर एप्लिकेशन डिप्लोमा कोर्स का समापन बुधवार को हुआ। इस अवसर पर नेहरू कॉलेज परिसर में प्रमाणपत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें सफल प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य डॉ शुभजीत चक्रबर्ती, डॉ जुलि शर्मा (सर्विस डायरेक्टर), सुभाष धर,(सह-अध्यक्ष), राजा भट्टाचार्य (डायरेक्टर), पन्ना दास (रोटेरियन), जन्मेजय भट्टाचार्य (कोर्स के प्रशिक्षक) सहित कॉलेज के अन्य प्राध्यापक और प्राध्यापिकाएँ उपस्थित रहे।
सभा में प्राचार्य डॉ. शुभजीत चक्रवर्ती ने अपने संबोधन में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में कंप्यूटर ज्ञान युवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के भविष्य को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बाद प्रतिभागियों के बीच प्रमाणपत्र वितरित किए गए और समारोह का समापन हुआ।
इसी दिन रोटरी क्लब ग्रेटर सिलचर और नेहरू कॉलेज के संयुक्त सहयोग से जलजनित रोगों और उनके बचाव के उपायों पर एक जागरूकता सभा भी आयोजित की गई। कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शुभजीत चक्रवर्ती, सर्विस डायरेक्टर डॉ. जूरी शर्मा, रोटरी क्लब के पदाधिकारी सुभाष कुमार धर, राजा भट्टाचार्य, पन्ना दास, प्रशिक्षक जन्मजय भट्टाचार्य सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएँ और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
सभा में डॉ. जूरी शर्मा और प्राचार्य डॉ. शुभजीत चक्रवर्ती ने जलजनित रोगों के कारण, उनके प्रभाव तथा उनसे बचाव के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्वच्छ पानी के उपयोग, साफ-सफाई और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को अत्यंत आवश्यक बताया। इसके बाद अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज के बीच तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देना था।



















