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गुरुचरण विश्वविद्यालय में “भारतीय इतिहासलेखन” पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

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सिलचर, 25 सितम्बर।
गुरुचरण विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग और भारतीय इतिहास संकलन सोसायटी, कछार जिला शाखा के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय इतिहासलेखन” विषय पर तीन दिवसीय (30 घंटे की) इंटर्नशिप एवं कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार को विश्वविद्यालय के सभागार में हुआ। यह कार्यशाला 27 सितम्बर तक जारी रहेगी।

कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत कलाकार ज़ुबिन गर्ग द्वारा गाए गए असमिया राज्य गीत से हुई, जो उनके प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि का प्रतीक रहा। इस अवसर पर देशभर के प्रख्यात इतिहासकारों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया और भारतीय परिप्रेक्ष्य से इतिहास अध्ययन की विविध विधियों पर विचार-विमर्श किया।

मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के राष्ट्रीय महासचिव हेमंत धींग मजूमदार ने भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास लेखन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विरासत की पुनर्स्थापना और स्वदेशी दृष्टिकोण को अपनाना समय की आवश्यकता है।

असम विश्वविद्यालय की इतिहास विभाग की प्रोफेसर सुपर्णा रॉय ने ऐतिहासिक अभ्यास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा प्रस्तुत की, जिससे भारतीय ऐतिहासिक परंपरा के विकास और उसके विस्तार की गहरी समझ विकसित हुई। वहीं, श्रीभूमि रवींद्र सदन गर्ल्स कॉलेज, कोलकाता के सहायक प्रोफेसर डॉ. नीलांजन डे ने राष्ट्रवादी एवं मार्क्सवादी इतिहासलेखन का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया और उसे राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से समझाया।

गुरुचरण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निरंजन रॉय, कार्यशाला के मुख्य संरक्षक के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ ऐतिहासिक चेतना के नए स्वरूप के निर्माण में सहायक होती हैं।

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर अभिजीत जायसवाल ने किया, जबकि समापन एवं धन्यवाद ज्ञापन विभाग की अतिथि प्रोफेसर डॉ. देवांगना नाथ ने प्रस्तुत किया।

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