शिवकुमार, शिलचर | प्रेरणा भारती न्यूज़ नेटवर्क, 15 फरवरी:
प्रेरणा भारती न्यूज़ नेटवर्क के मुख्य संपादक दिलीप कुमार द्वारा लिए गए विस्तृत साक्षात्कार में वरिष्ठ चिकित्सक, समाजसेवी और जनसरोकारों से जुड़े ने स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक दायित्व और अपनी राजनीतिक सोच पर खुलकर विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जितनी आवश्यकता सत्तापक्ष की है, उतनी ही जरूरत एक जिम्मेदार और सक्रिय विपक्ष की भी है।
15 वर्षों से सतत समाजसेवा
डॉ. कलवार पिछले लगभग 15 वर्षों से निरंतर सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। वे नियमित रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करते हैं, जहां ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुफ्त जांच और दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं। विभिन्न गांवों और बस्तियों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से वे लोगों को बीमारियों के लक्षण, समय पर उपचार और बचाव के उपायों की जानकारी भी देते हैं।

उन्होंने चिंता जताई कि आज भी आम लोगों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का अभाव एक गंभीर समस्या है। कई मरीज अंतिम अवस्था में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे उपचार जटिल हो जाता है। हार्ट अटैक, स्ट्रोक, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के प्रति समय रहते जागरूकता बेहद आवश्यक है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य शिक्षा को प्राथमिकता देने पर उन्होंने जोर दिया।
कोविड-19 का अनुभव: चुनौती और समर्पण
कोविड-19 महामारी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में इलाज को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव सबसे बड़ी चुनौती था। बदलते सरकारी और विशेषज्ञ दिशानिर्देशों के आधार पर उपचार करना पड़ा। महामारी की दूसरी लहर में स्थिति अत्यंत गंभीर रही, लेकिन डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मिलकर हर संभव प्रयास किया।
राजनीति सेवा का माध्यम, लक्ष्य नहीं
राजनीति में सक्रियता पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर व्यक्ति केवल सत्ता में भागीदारी चाहता है तो लोकतंत्र कमजोर हो सकता है। सरकार के कार्यों की निगरानी और जनता की आवाज उठाने के लिए मजबूत विपक्ष अनिवार्य है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में जाति और धर्म से ऊपर उठकर विकास, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर विमर्श होना चाहिए।
बराक घाटी के विकास की रूपरेखा
बराक घाटी के संदर्भ में उन्होंने कृषि, मत्स्य पालन, डेयरी और लघु उद्योगों को रोजगार सृजन का मजबूत आधार बताया। स्थानीय संसाधनों पर आधारित योजनाओं और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। उनका मानना है कि बेरोजगारी की समस्या का समाधान क्षेत्रीय उत्पादन और स्थानीय बाजारों के विकास में निहित है।
संगठन और सामाजिक पहल
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में संगठन पहले अपेक्षाकृत कमजोर था, लेकिन जनसंपर्क और संवाद के माध्यम से स्थिति में सुधार आया है।
सामाजिक कार्यों के तहत शव वाहन सेवा, गरीब छात्रों को पुस्तक वितरण, जरूरतमंदों को वस्त्र वितरण और शिक्षकों का सम्मान जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं। कई मामलों में आर्थिक रूप से असमर्थ परिवारों को ये सेवाएं निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
योजनाओं में पारदर्शिता की जरूरत
सरकारी योजनाओं के वितरण में पक्षपात के आरोपों पर उन्होंने कहा कि लाभ पात्र व्यक्ति तक बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के पहुंचना चाहिए। यदि वितरण में असमानता होती है तो समाज में असंतोष और विभाजन की भावना बढ़ती है। प्रशासन को सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
अंततः सेवा ही प्राथमिकता
साक्षात्कार के अंत में डॉ. कलवार ने दोहराया कि राजनीति उनके लिए जनसेवा का एक माध्यम है, अंतिम लक्ष्य नहीं। वे राजनीति में रहें या न रहें, समाजसेवा और स्वास्थ्य जागरूकता का कार्य निरंतर जारी रहेगा।




















